विदेशी कॉलेजों खासकर अमेरिका में पढ़ने के लिए जरूरी है…

विदेशी कॉलेजों खासकर अमेरिका में पढ़ने के लिए जरूरी है…

विदेशी कॉलेजों खासकर अमेरिका में पढ़ने के लिए सबसे जरूरी है, एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ परपस। इसका मतलब यह हुआ कि आप यह बताएं कि आखिर आप वहां क्यों पढ़ने जाना चाहते हैं/ एसओपी को ऐप्लिकेशन फॉर्म के साथ जमा करना होता है। इसके जरिए संस्थान यह फैसला करते हैं कि फलां स्टूडेंट को अपने यहां दाखिला दें या नहीं। इसे काफी संभलकर लिखना होगा। लच्छेदार इंग्लिश के बजाय सिंपल इंग्लिश लिखें। वहां के लोग सिंपल इंग्लिश ज्यादा पसंद करते हैं। इसमें गलतियां नहीं होनी चाहिए। कम शब्दों में अपनी बात लिखें। आमतौर पर एक A-4 पेज लिखना काफी होता है। सच लिखें और इमोशनल बनने से बचें। इसमें आप अपने बचपन के बारे में भी लिख सकते हैं, लेकिन अगर उसमें कुछ खास बात हो तो। अपने स्कूल और कॉलेज में अपनी परफॉर्मेंस के बारे में लिखिए। आप यह जरूर लिखें कि आपमें अपने काम को लेकर कितनी लगन है/ आप स्पेशलाइजेशन और एचीवमेंट के बारे में भी जिक्र करें। यहां बताएं कि आप अमेरिका में ही क्यों पढ़ना चाहते हैं, आपने यही यूनिवर्सिटी क्यों चुनी, आपने यही कोर्स क्यों चुना और इनका आपके करियर गोल से क्या ताल्लुक है/ अमेरिका रिसर्च का मक्का है। वहां हर तरह की रिसर्च होती रहती हैं। अगर आपने भी कोई रिसर्च की हो तो जरूर लिखें। इससे आपकी दावेदारी मजबूत होती है। अगर आप यह इच्छा जाहिर करें कि अमेरिका में पढ़ाई के बाद आप वहां रिसर्च करना चाहते हैं तो यह और भी बेहतर होगा।

Cover Letter

यह भी ऐप्लिकेशन का बड़ा हिस्सा है। इसमें आप सीधे सब्जेक्ट पर आ जाएं और लिखें कि हमें आपके इंस्टिट्यूट या कॉलेज में एडमिशन चाहिए और इसके लिए आप जरूरी डॉक्युमेंट भेज रहे हैं। इनमें सभी कुछ होना चाहिए, मसलन अपने बायोडाटा से लेकर फीस तक की डिटेल्स। इसके साथ ही आपको टॉफल और जीआरई या जीमैट के स्कोर की फोटोकॉपी देनी होगी। सभी तरह के ऐकडेमिक रेकॉर्ड और ऐफिडेविट का भी इसमें जिक्र होना चाहिए। एलओआर यानी लेटर ऑफ रिकॉमेंडेशन का भी जिक्र होना चाहिए। इसमें आप फाइनैंशल मदद की भी बात संक्षेप में लिख सकते हैं।

LOR

लेटर ऑफ रेफ्रेंस एक जरूरी दस्तावेज है जिसके बिना आप एडमिशन की बात सपने में भी नहीं सोच सकते। यह अमूमन आपके प्रोफेसर या टीचर की ओर से लिखा जाता है। बेहतर होगा अपने स्कूल-कॉलेज के टीचर से ही इसे लिखवाएं। इसके लिए एक परफॉर्मा आता है जो हर कॉलेज खुद भेजता है। कई कॉलेज आपसे टीचर का नाम और उनका ईमेल मांगकर उन्हें सीधे मेल करेंगे ताकि टीचर सही फीडबैक दे सकें। एलओआर आमतौर पर 3 टीचर से लिखवाना होता है। यह सुनिश्चित कर लें कि टीचर आपके बारे में अच्छा लिखें। आप इन टीचर्स के नाम अमेरिकी कॉलेज या यूनिवर्सिटी को भेज सकते हैं। अगर आपने कहीं जॉब किया है तो वहां से भी एलओआर ले सकते हैं। यह बेहतर माना जाता है। अमेरिका में मैनेजमेंट वगैरह की पढ़ाई में ज्यादातर वहीं कैंडिडेट होते हैं जिन्होंने वहां किसी किस्म की नौकरी की है। उन्हें प्रिफरेंस मिलता है इसलिए अपने बॉस से एलओआर लेना कहीं बेहतर होगा।

वीजा मिल जाने के बाद आपको दूसरी तैयारियां भी करनी होंगी जैसे वहां रहने का इंतजाम, मेडिकल इंश्योरेंस आदि। आमतौर पर वैसे वीजा ऐप्लिकेशन में आपसे यह पूछा जाएगा कि आप कहां रहेंगे/ इसमें आमतौर पर स्टूडेंट्स जिस कॉलेज में एडमिशन लेने जा रहे हैं, वहां के इंटरनैशनल ऑफिस का एड्रेस या किसी फ्रेंड का एड्रेस दे सकते हैं। बाद में आप अपने रहने की जगह बदल भी सकते हैं। रहने की जगह तलाशने से पहले इंटरनेट पर ब्लैक लिस्टेड एरिया सर्च कर लें। यहां घर न लें। जहां तक खर्चे की बात है तो इलाके और कॉलेज की रैंकिग के हिसाब से फीस और रहने के खर्चे में काफी फर्क होता है। मसलन अगर आप न्यू यॉर्क जैसे शहर में रहते हैं तो आपको सिंगल बेडरूम के लिए 1000 डॉलर (करीब 66 हजार रु.) हर महीने तक चुकाने पड़ सकते हैं, जबकि अलबामा, जॉर्जिया राज्यों के गैर शहरी क्षेत्रों में चार कमरों के घर भी किराये पर 700 डॉलर महीना तक में मिल जाएगा। इसी तरह, रहन-सहन पर कम-से-कम 500-600 (करीब 35-40 हजार रु.) डॉलर महीना खर्च करने ही होंगे। हालांकि बड़े शहरों में 1300-1400 डॉलर (करीब 85-95 हजार रु.) महीना तक आसानी से खर्च हो सकते हैं। अमेरिका में विदेशी स्टूडेंट्स को हर महीने 20 घंटे काम करने की छूट है, लेकिन सिर्फ कैंपस में। कैंपस के बाहर काम गैर-कानूनी होगा। कैंपस के अंदर रेस्तरां में कुकिंग, क्लीनिंग, यूनिवर्सिटी पुलिस या लाइब्रेरी हेल्पर जैसे काम कर सकते हैं। इनसे मिलनेवाली रकम से खर्चा चलाने में मदद मिलती है।अगर आपको पसंदीदा कॉलेज मिल जाता है तो वीजा की तयारी करनी होगी। स्टूडेंट्स के लिए I -20 वीजा की जरूरत होती है। इसके लिए  आपके पास यूनिवर्सिटी से मिला F-1 फॉर्म जरूर होना चाहिए। वीजा के फॉर्म को ध्यान से भरना चाहिए और उसमें गलतियां नहीं होनी चाहिए। कोई भी सूचना छुपानी नहीं चाहिए। हर बात साफ-साफ बतानी चाहिए। पूरे विश्वास के साथ बताएं कि आप पढ़ाई करने जा रहे हैं, न कि उनके देश पर बोझ बनने। ध्यान रहे कि कॉलेज में एडमिशन हो जाने भर से आपको वीजा मिल ही जाएगा, यह जरूरी नहीं। वीजा वहां के इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक मिलता है। जरा-सी गलती पर यह रिजेक्ट हो सकता है। फिलहाल F-1 वीजा की ऐप्लिकेशन फीस 160 डॉलर यानी 10,880 रुपये है, जोकि वापस नहीं होती। जीआरई, जीमैट और टॉफेल आदि टेस्ट की ऑरिजनल रिपोर्ट शीट के अलावा वीजा ऑफिसर आमतौर  पर बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी चेक करते हैं कि दूसरे देश जाकर पढ़ाई करने के लिए आपके पास पैसा है या नहीं/ बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसा होना जरूरी है।

• अमेरिकी सरकार की वेबसाइट usa.gov/study-in-us पर जाएं। वहां से अमेरिका जाकर पढ़ाई करने के बारे में बेसिक और प्रामाणिक जानकारी मिल जाएगी। फिर आप जिस सब्जेक्ट की पढ़ाई करना चाहते हैं, वह कौन-कौन से कॉलेज और यूनिवर्सिटी में है, यह पता लगाएं। वह कॉलेज कैसा है, यह जानने की कोशिश करें। कॉलेज की वेबसाइट के अलावा उससे जुड़ी तमाम वेबसाइट्स पर जाएं। वहां के स्टूडेंट्स कहां-कहां काम कर रहे हैं, यह जानकारी हासिल करें। सभी कॉलेजों की एल्मनै (एल्युमिनाइज) असोसिएशन भी हैं, जो सोशल मीडिया (फेसबुक आदि) पर एक्टिव होती हैं। कॉलेज के बारे में उनके रिव्यू पढ़ें। कुछ निगेटिव कमेंट्स हैं तो उन पर खास ध्यान दें।

अमेरिका में हर कॉलेज की रैंकिंग होती है और वह ऑनलाइन उपलब्ध है। इसके लिए कई वेबसाइट्स आपकी मदद कर सकती हैं जैसे: usnews.com/best-colleges पर जाकर बेस्ट कॉलेज या यूनिवर्सिटी की रैंकिंग देख सकते हैं। इसके अलावा forbes.com पर जाकर Lists पर क्लिक करके Education में टॉप कॉलेज या इंस्टिट्यूट देख सकते हैं।

• आपने जो कॉलेज शॉर्टलिस्ट किए हैं, उनकी साइट पर जाकर Department of General Queries वाले ऑप्शन में जाएं। वहां दिए हुए ईमेल आईडी पर अपनी क्वैरीज को मेल कर दें। रिक्वेस्ट लेटर के साथ अपना एक शॉर्ट बॉयोडाटा भी भेजें। रिक्वेस्ट लेटर भेजने के बाद ज्यादातर यूनिवर्सिटीज आपको ऑनलाइन ऐप्लिकेशन फॉर्म भेजती हैं। अगर यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई जवाब नहीं आता है तो कुछ समय बाद दोबारा रिक्वेस्ट भेजें।

विदेशी कॉलेजों में काउंसलर या रिप्रेजेंटेटिव होते हैं। जब आप कॉलेज के लिए अप्लाई करेंगे तो मेल उन तक पहुंचेगी और वे आपसे कॉन्टैक्ट करेंगे। वे ईमेल के जरिए आपसे जुड़े रहेंगे। आपको खुद भी सतर्क रहना होगा और अपने ऐप्लिकेशन को ट्रैक करते रहना होगा ताकि डेडलाइन न निकल जाए।

यूनिवर्सिटी को सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स मिलते ही स्टूडेंट्स ऐप्लिकेशन फॉर्म को एडमिशन कमिटी के पास भेज दिया जाता है। ऐप्लिकेशन प्रोसेस पूरा होने के बाद जबाव आने में 1-2 महीने का समय लग जाता है। वे चाहें तो आपका इंटरव्यू भी ले सकते हैं। इसके लिए वे आपको कॉल करते हैं। अगर आपकी ऐप्लिकेशन स्वीकार कर ली जाती है तो उसके बाद वीजा के लिए अपने डॉक्युमेंट्स तैयार करने शुरू कर दें। आपको इस दौरान स्कॉलरशिप का भी ध्यान रखना होगा और उसके लिए भी पता लगाते रहना होगा। इन स्कॉलरशिप की जानकारी वे कॉलेज ही देते हैं जहां आप अप्लाई करेंगे। आप ईमेल से मंगा सकते हैं। नेट से इस तरह के स्कॉलरशिप की जानकारी मिल सकती है।

अमेरिका में एडमिशन के लिए आपको यह बताना होगा कि आप वहां क्यों पढ़ना चाहते हैं। इसे एसओपी यानी स्टेटमेंट ऑफ परपस कहते हैं। बेहतर होगा कि इसके लिए किसी एक्सपर्ट की मदद लें। एसओपी के अलावा एलओआर यानी लेटर ऑफ रिकमेंडेशन भी बहुत अहम है। कई यूनिवर्सिटी इसे कागज पर मांगती हैं जबकि कुछ ईमेल पर। इसके जरिए वे स्टूडेंट के बारे में सारी जानकारी जुटा लेती हैं।

• अब आप सब्जेक्ट और कोर्स के हिसाब से दूसरे टेस्ट देने को तैयार हो जाएं। 12वीं के बाद कॉलेज में एडमिशन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आपको सैट (SAT यानी स्कॉलेस्टिक एप्टिट्यूड टेस्ट) देना होगा, जबकि पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए जीमैट (GMAT यानी ग्रैजुएट मैनेजमेंट टेस्ट) या जीआरई (GRE यानी ग्रैजुएट रेकॉर्ड एग्जामिनेशन) देना होगा। मैनेजमेंट में एडमिशन के लिए GMAT और इंजीनियरिंग, मेडिकल, रिसर्च आदि के लिए GRE देना होता है। कुछ खास यूनिवर्सिटी सब्जेक्ट स्पेसिफिक GRE भी लेती हैं। इन एग्जाम्स के नंबर के आधार पर ही आपको एडमिशन मिलेगा। कुछ कॉलेज इनके बिना भी एडमिशन देते हैं लेकिन उनकी तादाद कम है।study abroad

आप विदेश में पढ़ाई के लिए तभी जा सकेंगे, जब आप इंग्लिश के इलिजिबिटी टेस्ट टॉफल (TOEFL) या आइलिट्स (IELTS) में अच्छे मार्क्स लाएंगे। इन एग्जाम्स के दौरान आपकी इंग्लिश रीडिंग, राइटिंग, स्पीकिंग और सुनने की क्षमता की जांच होती है। इसके ही आधार पर आपको पॉइंट्स मिलते हैं। खास बात यह है कि एक बार अच्छे मार्क्स नहीं आने पर आप फिर टेस्ट दे सकते हैं और जिस टेस्ट का स्कोर बेहतर हो, उसे ही रेकॉर्ड में दे सकते हैं। इंग्लिश के लिए IELTS टेस्ट ज्यादातर देशों में मान्य है और इसका एग्जाम देश भर में 42 सेंटर्स पर होता है। ज्यादा जानकारी के लिए देखें: ielts.org अमेरिका में एडमिशन के लिए TOEFL देना होता है। इंग्लैंड, न्यूजीलैंड आदि देशों के लिए IELTS दिया जाता है। हालांकि ज्यादातर देश अब TOEFL को


• अगर 12वीं के बाद पढ़ने के लिए विदेश जाना चाहते हैं तो बेहतर है कि 11वीं क्लास से ही तैयारी करें। जिस सब्जेक्ट में आगे बढ़ना चाहते हैं, उस पर खास फोकस करें। रिजल्ट बेहतर करें। जितने अच्छे नंबर, उतने अच्छे कॉलेज में एडमिशन का मौका होगा। साथ ही, इंग्लिश भी सुधारें। फॉरेन एजुकेशन के लिए सबसे जरूरी इंग्लिश का अच्छा ज्ञान होना है। तैयारी के लिए बडी सिस्टम काफी अच्छा होता है यानी जो आप अपने किसी ऐसे दोस्त के साथ मिलकर तैयारी करें, जो खुद भी फॉरन यूनिवर्सिटी में जाना चाहता हो। आप एक-दूसरे का सपोर्ट बनें तो साथ ही एक-दूसरे को चैलेंज भी करें। इससे तैयारी बेहतर होती है। साथी न मिले तो अकेले ही चलें। इंग्लिश के लिए ग्रामर और वोकैबलरी पर खासतौर पर फोकस करे। इसके लिए इंग्लिश मूवीज़, इंटरनैशनल इंग्लिश न्यूज चैनल, नैशनल जियोग्रफिक चैनल आदि देखें। इंग्लिश न्यूजपेपर और मैगजीन पढ़ें। अच्छी वेबसाइट्स पर जाकर पढ़ें।


अमेरिका में ज्यादातर यूनिवर्सिटी 2 सेमिस्टर में एडमिशन देती हैं: 1. स्प्रिंग (जनवरी) और फॉल (अगस्त) सीजन में। ज्यादा एडमिशन अगस्त में होते हैं। अगस्त में एडमिशन कराना ज्यादा अच्छा रहता है क्योंकि इस समय यूनिवर्सिटीज़ में ज्यादा सीटें उपलब्ध होती हैं जबकि जनवरी तक सीटें भर जाती हैं। जनवरी में सीटें कम रह जाने के कारण सिलेक्शन क्राइटिरिया भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इससे एडमिशन मिलने में मुश्किल होती है। अगर आप अगस्त 2017 में एडमिशन चाहते हैं तो इसके लिए साल भर पहले यानी इसी साल अगस्त-सितंबर से तैयारी शुरू कर दें। सबसे पहले SAT या GMAT/GRE और TOEFL/IELTS दें। ये टेस्ट क्लियर करने के बाद ऐप्लिकेशन (SOP, Cover Letter, LOR समेत) भेजने का काम नवंबर तक पूरा हो जाना चाहिए। आमतौर पर दिसंबर तक यूनिवर्सिटी से ऑफर लेटर आ जाता है। ऑफर स्वीकार करने के लिए 3-4 हफ्ते का टाइम दिया जाता है।